रविवार, 2 अगस्त 2015

क्यों मिल रही है याकुब को इतनी सहानभूती, क्या मुस्लिम होने की सजा पा रहे है मुस्लमान, क्या है देश की दिशा........

अभी एक बहुत प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनल का आर्टिकल पड़ रहा था, उसमें उसी आतंकवादी के बारे में बताया गया था जिसनें 1993 में मुंबई में ब्लास्ट करवा कर पूरे हिदूंस्तान को हिला कर रख दिया था... आखिर क्यों इस आतंकवादी के बारें हर दिन कोई ना कोई खबर अखबारों औऱ टीवी चैनलों पर चल रहा है...
 खैर, इस आर्टिकल में ये बताया गया था कि उस आतंकवादी के जनाजे पर 8000 से ज्यादा लोग पहुंचेे हुए थे, मुझे एक बात बहुत चुभी, जब मैने इस पूरे आर्टिकल को पढ़ा, इसमें ये कारण बताया था कि आखिर क्यो इतने लोग याकुूब के जनाजे में शामिल हुए थे, इसकी माने तो याकुब को एक मुस्लमान होने की सजा दि गई है... आर्टिकल में कहा गया है कि 94 % जिन्हें फांसी हुई है वो मुस्लमान है.... अगर आर्टिकल का मतलब  निकालू तो वो ये कहना चाहता है कि देश मे मुस्लामन खुश नहीं है.... वो याकुब के जनाजे में इस लिए शामिल होने गए थे क्योकि कहीं ना कहीं खुद को भी वो प्रताडित पाते है....
जिस महान शख्स ने आर्टिकल लिखा है वो चाहे जो भी है, मैं उन्हे ये बताना चाहता हूं कि आज भी जेल में कई मुस्लिम  बंद है अगर भारत मु्स्लिमों के साथ भेद भाव कर रहा है तो आज सभी फांसी पर लटक चुके होेते
... किसी मुस्लमान को कहीं नौकरी नहीं मिलती, लोगो के पास रहने को घर नहीं होता... कोई आज भारत देश का विधायक, सिएम, और राष्ट्रपति नहीं होता... भाई साहब आपका आंकड़ा शायद सहीं भी हो, मैं ये जानना चाहता हूं कि,जिन्हें भी फांसी हुई वो सब क्या बेगुनाह थे...औऱ रही राजीव गांधी और मोहन करम चंद गांधी  के हत्यारें की बात तो उन्होंने कोई आतंकवादी हमला नहीं किया था... उस हमलें में लाखों लोगो की जान नहीं गई थी  देश की संपत्ती का नुकशान नहीं हुआ था... उसने इन लोगो को इस लिए मारा था कि उसें लगा कि वो जो भी काम कर रहे है वो भारत देश के हित में नहीं है.....
बहरहाल मैं उन मुस्लमान भाई औऱ दोस्तों से ये कहना चाहता हूं कि भारत देश आप लोगो के साथ कोई भी भेद भाव नहीं कर रहा है... अगर फिर भी आप लोग कुछ नेताओं के भाषणों को सुनकर खुद को प्रताडीत महसूस करते है तो आपके पास एक औऱ रास्ता है, थोड़ा मुश्किल है पर आप शायद खुश हो, वो रास्ता ये है कि आप भारत छोड़ दे, आप पाकिस्तान, इराक, इरान आफिगानिस्तान या फिर कहीं औऱ चले जाईए... जहां भी आप खुद को सुरक्षित सझते है....      


सतीश सिंह

बुधवार, 29 जुलाई 2015

क्या है याकुब का सच?, जिस दिन दुनिया में रखा कदम उसी दिन दुनिया से होंगे रुसवा, 30 जुलाई इतिहास के पन्नों में दर्ज

देश में इन दिनों दो मु्द्दों ने खुब सुर्खियां बटोरी है, एक तो है आतंकी गतिविधी में लिप्त पाए गए याकुब मेमन और दुसरें है, मिसाईल मैन जिसने पूरी दुनिया को अपना लोहा मनवाया है, इस शख्स के बारे में हर कोई अच्छी तरह वाकिफ है, ड़ॉ एपीजे अब्दुल कलाम जितना बड़ा नाम उतनी ही बड़ी इनकी शख्ससियत है.... खैर हमारा मुद्दा डॉ कलाम नही है बल्कि वो आतंकवादी है या फिर आतंकवादी बनाया जा रहा  है, हम बात कर रहे है याकुब मेमन की, मैंने हाल ही में इसके बारे में बड़े ध्यान से पड़ा है, पहले मैं भी आम लोगो की तरह  इसे भी आतंकवादी समझ बैठा, लेकिन जब मैने इसके बारे में पड़ा तब मेरी राय इसके प्रति बदल गई, लेकिन कुछ सवाल अभी भी ऐसे है जो सुलझे नहीं है... सरकार या फिर कोर्ट की माने तो ये 1993 के ब्लास्ट में शामिल था परक्या ये सच है...
  सेंट्रल मुंबई के बाइकुला में याकूब पला बढ़ा था.. वो औसत स्टूडेंट रहा, स्टेट सेकंडरी बोर्ड का एग्जाम याकूब ने 70 पर्सेंट मार्क्स के साथ पास किया था... फिर इसने बुरहानी कॉलेज ऑफ कॉमर्स ऐंड आर्ट्स से कॉमर्स में मास्टर किया... दूसरी तरफ याकूब का बड़ा भाई इब्राहिम मेमन उर्फ टाइगर मुंबई अंडरवर्ल्ड में अपना नाम स्थापित कर रहा था...
1986 में याकूब इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया का स्टूडेंट बना, चार साल बाद याकूब चार्टड अकाउंटेंट बन गया... इसके बाद याकूब के परिवार वालों की जिंदगी में बेहतरी आने लगी... टाइगर मेमन ने अपनी अवैध गतिविधियां बढ़ा दी थीं... हालांकि मेमन दावा करता है कि वह अपने बड़े भाई की अवैध ...गतिविधियों में शामिल नहीं था याकूब ने अपने दोस्त चैतन्य मेहता के साथ मिलकर एक फर्म बनाया था... इसका नाम 'मेहता ऐंड मेमन असोसिएट्स' दिया था...पुलिस के मुताबिक याकूब अपने बड़े भाई टाइगर का अकाउंट हैंडल करता था.. याकूब पर आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगा और पुलिस ने दावा किया कि उसने 1993 में मुंबई ब्लास्ट के लिए फंड की व्यवस्था की थी... विस्फोट के पहले याकूब और उसके परिवार वालों ने शहर छोड़ दिया था... ब्लास्ट में जिस गाड़ी का इस्तेमाल किया गया था उसे मेमन के परिवार वालों के पास से बरामद किया गया...
आगे चलकर मेमन का परिवार दुबई चला गया और फिर वहां से पाकिस्तान शिफ्ट हो गया.... हालांकि मेमन 18 महीने बाद इंडिया वापस आ गया... सीबीआई का दावा है कि याकूब को 5 अगस्त 1994 मे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से अरेस्ट किया गया... दूसरी तरफ मेमन का दावा है कि वो नेपाल में स्वेच्छा से 28 जुलाई 1994 को भारतीय एजेंसियों के समक्ष हाजिर हुआ था मेमन परिवार के सात और सदस्यों ने भारतीय एजेंसियों के समक्ष समर्पण कर दिया था...
 दुसरी तरफ आगर याकुब सही कह रहा है, तो फिर ये भारत के न्याय प्रणाली पर एक काला धब्बा होगा मैं पहले भी कह चूका है कि देश की इस कानून को तोड़ा बदलने की जरुरत है, 22 साल हो गए है इस आतंकी हमले को लेकिन उसकी सज़ा अब क्यो.. क्या इसकी जरुरत है...
लेकिन सवाल यहीं उठता है कि आखिर याकुब को दुबई जाने की जरुरत क्यो पड़ी और उस ब्लास्ट के समय वो भी पूरे परिवार के सांग, दुबई से नेपाल, नेपाल से पाकिस्तान आखिर इतना क्यो ट्रेवल कर रहा था याकुब... क्या इस ब्लास्ट के बारे में इस कुछ पता था... अगर था तो इसका जिम्मेदार वो भी उतना है जितना उसका बाई टाईगर...
 30 जुलाई को याकुब का जन्म हुआ और इतेफाक देखिए उसी दिन ही याकुब को फासी दी जा रही है... कुछ अनसुलझे गाठ याकुब 30 जुलाई को अपने साथ ले जाएगा, मैं भगवान से यही प्राथना करता हूं कुछ भी हो याकुब  निर्दोश  ना हो, वरना हम भारत वासियों  इंसानियत के नाम पर एख कलंक कहलाने वाले है.....  


रविवार, 5 जुलाई 2015

देश में डवलपमेन्ट हो रहा है

बेटा बाप से इंटैलिजेंट हो रहा है
अमिरों का काम अर्जेंट हो रहा है
गरीब बेचारे साइलैंट हो रहा है
रिश्वत से कार्य हैण्ड टू हैण्ड हो रहा है
ईमानदार बेचारा सस्पेण्ड हो रहा है
प्रदूषण आज हण्ड्रेड परसेंन्ट हो रहा है
चोरी और डैकती परमानेन्ट हो रहा है
फिर भी देश में डैवलपमेन्ट हो रहा है 

शुक्रवार, 3 जुलाई 2015

एक कदम सकारात्मक सोच की ओर...

महात्मा गांधी का प्रसिद्ध कथन है कि इंसान वैसा ही बनता जाता है जैसी वो सोच रखता है... ये विचार छोटे या बड़े हर व्यक्ति पर लागू होता है.. आप जिंदगी में सफल तभी हो सकते हैं जब आप सफलता हासिल करने के प्रति अपनी सोच को सकारात्मक रखेंगे... अगर अपनी खामियां ढूंढ-ढूंढकर खुद को कमतर ही आंकते रहेंगे तो कभी सफलता की ओर कदम नहीं बढ़ा सकेंगे..

अगर आप थोड़ी सी परेशानियों से घिरने पर खुद की क्षमताओं पर ही संदेह करने लगेंगे तो सफल होना मुश्किल है.. हो सकता है कि एक बार प्रयास करने पर सफलता न मिले लेकिन अगर आप नकारात्मकता से दूर रहते हुए पूरे मन से प्रयास करेंगे तो सफलता मिलनी तय है...

सकारात्मक सोच का संबंध सिर्फ आपके करियर से ही नहीं है, ये आपके परिवारिक और सामाजिक जीवन से भी जुड़ी है... नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति अपने आसपास एक ऐसा नकारात्मक माहौल बना लेते हैं.. जो उनके साथ-साथ उनके आसपास के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालता है...

कभी गौर करें कि जब आप जीवन के प्रति सकारात्मक बातें करते हैं तो बहुत से लोग आपकी ओर आकर्षि‍त होते हैं वहीं अगर आप हर समय जीवन के नकारात्मक पहलुओं को ही कुरेदते रहते हैं तो हर कोई आपके साथ से बचना ही चाहता है....

जीवन से जुड़ी अपेक्षाएं पूरी न होने पर निराशा स्वाभाविक है लेकिन अगर आप उस निराशा के अंधेरे में ही डूबे रहेंगे तो आशा की दूसरी किरणों को पहचान भी नहीं पाएंगे. याद कीजिए फिल्म थ्री इडियट्स में आमिर खान का वो जुमला-‘ऑल इज वैल’...

आमिर इस फिल्म में कहते भी हैं कि ये जुमला कहने का ये मतलब नहीं कि सारी परेशानियां खत्म हो गईं बल्कि इसे बोलने का मकसद तो हमारे सामने पेश आने वाली परेशानियों से लड़ने की ताकत हासिल करना है... 

गुरुवार, 2 जुलाई 2015

मेरे अलफाज़: कलम है पर सोच नहीं, लिखें तो लिखें क्या ?

मेरे अलफाज़: कलम है पर सोच नहीं, लिखें तो लिखें क्या ?: बहुत दिन से सोच रहा हूं कि कुछ लिखूं... लेकिन किस पर लिखूं... कांग्रेस पर लिखने लायक कुछ बचा नहीं है... फिर भी लिख दिया तो सांप्रदायिक होन...

मेरे अलफाज़: जिसको भारत स्वीकार नहीं, वो पाकिस्तान चला जाये...

मेरे अलफाज़: जिसको भारत स्वीकार नहीं, वो पाकिस्तान चला जाये...: अब वो नस्ल है बदल चुकी , जब फिर से हिन्दू छला जाये , जिसको योगा स्वीकार नहीं वो मक्का मदीना चला जाये, जिसको भारत स्वीकार नहीं , वो पाकिस्...

मेरे अलफाज़: क्या है देश की स्थिति.........

मेरे अलफाज़: क्या है देश की स्थिति.........: 15 जून को मनाया जाता है WORLD ELDER ABUSE DAY, देखिए इतनी शर्मनाक बात है कि ये इतना ज्यादा होता है कि इसके लिए अलग दिन रखा गया है... हाल ही...

मेरे अलफाज़: फिल्म को प्रमोट करने के लिए ''साला कुछ भी करेंगे''...

मेरे अलफाज़: फिल्म को प्रमोट करने के लिए ''साला कुछ भी करेंगे''...: न जाने ये फिल्मी सितारें अपनी फिल्म को प्रमोट करने के लिए न जाने क्या क्या करेंगे.....अगर इनके प्रमोशन के तरीको को देखा जाए तो इससे साफ अंद...

बुधवार, 1 जुलाई 2015

कलम है पर सोच नहीं, लिखें तो लिखें क्या ?

बहुत दिन से सोच रहा हूं कि कुछ लिखूं... लेकिन किस पर लिखूं... कांग्रेस पर लिखने लायक कुछ बचा नहीं है... फिर भी लिख दिया तो सांप्रदायिक होने का ठप्पा झेलो बीजेपी या केंद्र सरकार के खिलाफ लिखो तो भक्त पोस्ट को पढ़ने लायक नहीं छोड़ेंगे... आम आदमी पार्टी के बारे में लिखो तो इनके स्पेशल फॉलोवर्स या तो आपको बीजेपी वाला बता डालेंगे... या फिर विपक्ष की साजिश... और अगर किसी की तारीफ कर दो तब तो और भी गजब हो जाएगा... कांग्रेस की तारीफ करने पर भक्तगण और आपिये नहीं छोड़ेंगे... बीजेपी की तारीफ करने पर पहले तो सांप्रदायिकता का ठप्पा और फिर सभी पार्टियों के चेले चमकाना शुरू कर देंगे... और आप की तारीफ कर दो तब तो कुछ भी हो सकता है.... अब बची जनता... उस पर क्या लिखा जाए.... वो वैसे ही परेशान है... और अगर कुछ लिख दिया तब तो खुद को बुद्धिजीवी साबित करने के लिए कुछ लोग कुतर्कों की बाढ़ लगा देंगे... और ना लिखो तो यार दोस्त कहते हैं कि क्या हुआ बड़े दिनों से सोशल नहीं बचे हो... यानी हर तरह से मुसीबत ही मुसीबत...

मंगलवार, 23 जून 2015

फिल्म को प्रमोट करने के लिए ''साला कुछ भी करेंगे''

न जाने ये फिल्मी सितारें अपनी फिल्म को प्रमोट करने के लिए न जाने क्या क्या करेंगे.....अगर इनके प्रमोशन के तरीको को देखा जाए तो इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि वो फिल्म को प्रमोट नही बल्कि अपना अंग प्रदर्शनी कर रही है....जो भी लडकीयां दोस्त है मेरी, मुझे गलत मत समझना....लेकिन ये सच है ये महिला अभिनेत्री फिल्म के नही बल्कि अपनी अंग का प्रमोशन करती है....अच्छी बात है अगर आफ खूबसूरत है तो उसे सरेआम निलाम तो ना करें....ये सोच मेरी है कि रेप को बढावा ऐसी अभिनेत्रीयों कारण हो रहा है...हाल ही में पूनम पांडे हैदराबाद अपनी फिल्म को प्रमोट करने पहुंची मगर कही से भी ऐसा प्रतीत नही हो रहा है कि वो फिल्म को प्रमोट कर रही है....मेरा सवाल बस इतना सा है, क्या हम यही देखना चा रहे है, क्या सचमूच, ऐसे अनोखे तरिको से ही फिल्म हीट हो सकती....दोस्तों ये सोचने का टॉपिक है....पोस्ट की गई फोटो को देखिए और बताईए क्या हमारा समाज यही देखना चाहता है....जरा सोचिए


क्या है देश की स्थिति.........

15 जून को मनाया जाता है WORLD ELDER ABUSE DAY, देखिए इतनी शर्मनाक बात है कि ये इतना ज्यादा होता है कि इसके लिए अलग दिन रखा गया है... हाल हीं में दिल्ली में एक सर्वे हुआ जिसमें 85% यूथ को पता है कि ELDER ABUSE होता है, पर 92% लोगो ने कहा कि वो कुछ नहीं करेंगे TO PREVENT THIS, TO PREVENT ELDER ABUSE, शर्मनाक बात है!.... मां बाप का फर्ज क्या होता है ? मां बाप का फर्ज होता है बच्चें पैदा करके इस दुनिया में लाना, उनकी अच्छी देखभाल करना, उनका ध्यान रखना, पाल पोस के बड़ा करना और खूब सारा प्यार देना और बच्चो का फर्ज? बच्चो का फर्ज होता है कि वो प्यार भूल जाना, भूल जाना की हमारें मां बाप का हमपें इतना एहसान है कि अगर हम जिदंगी भर चुकाते रहे ना, तो 1% भी नहीं चुका पाएंगे… मैं चाहता हूं की आप इस बात को थोडा समझे कई बार हम इन चीजों को NOTICE नहीं कर पातें है और नजर अदांज कर देते है की चलो यार हल्का सा बोल दिया है, कोई बात नहीं लेकिन आपके मां बाप अगर उस एक कटाक्ष को दिल में बिठा के बैठ गए ना तो उनका दिल चूर चूर हो जाएगा...
I DON’T KNOW IF U WANT TO LIVE WITH THAT BURDEN, I DEFINITELY DON’T WANT TO… इस लिए में भी आज करुंगा और आप भी करीए जब आप घर जाते है तो अपने मां बाप को HUG करीए और कहीए कि U LUV DEM, TRY AND UNDERSTAND THEIR VIEW POINT ALSO… JUST BECAUSE U HAVE GROWN UP, DON’T THINK THEY DON’T HAVE ANY VIEW POINT....

जिसको भारत स्वीकार नहीं, वो पाकिस्तान चला जाये...

अब वो नस्ल है बदल चुकी , जब फिर से हिन्दू छला जाये , जिसको योगा स्वीकार नहीं वो मक्का मदीना चला जाये, जिसको भारत स्वीकार नहीं, वो पाकिस्तान चला जाये... हम त्याग चुके वो मानवता, जो कायरता कहलाती थी, कोई तिलक लगाता था तो , वो कट्टरता समझी जाती थी.... नियम ना माने जो घर के, वो लेकर सामान चला जाये, जिसको भारत स्वीकार नहीं, वो पाकिस्तान चला जाये...

सर्व धर्म समभाव के बदले , भारत का अपमान नहीं होगा , माता को डायन कहने वालों का, अब सम्मान नहीं होगा.. जबतक चुप बैठे हैं वो बचाकर अपनी जान चला जाए, जिसको भारत स्वीकार नहीं, वो पाकिस्तान चला जाए, जो जाति, धर्म, मज़हब का रोना, छाती पीटकर रोते हैं, आंतकियों के मरने पर उनकी, मय्यत में शामिल होते हैं, खून खौलता है सबका, कबतक हाथों को मला जाए, जिसको भारत स्वीकार नहीं, वो पाकिस्तान चला जाये...


कुछ लोग देश में गद्दारों को भी साहब और जी कहते हैं, जयचन्दों से है इतिहास भरा, ये हर युग में ही रहते हैं... हमदर्द हो जो गद्दारों का, वो खुद शमशान चला जाये, जिसको भारत स्वीकार नहीं ,वो पाकिस्तान चला जाए....