अब वो नस्ल है बदल चुकी , जब फिर से हिन्दू छला
जाये , जिसको योगा स्वीकार नहीं वो मक्का मदीना चला जाये, जिसको भारत स्वीकार नहीं, वो
पाकिस्तान चला जाये... हम त्याग चुके वो मानवता, जो कायरता कहलाती थी,
कोई तिलक लगाता था तो ,
वो कट्टरता समझी जाती थी.... नियम ना माने जो घर के, वो
लेकर सामान चला जाये, जिसको भारत स्वीकार नहीं, वो पाकिस्तान चला जाये...
सर्व धर्म समभाव के बदले , भारत का अपमान नहीं
होगा , माता को डायन कहने वालों का, अब सम्मान नहीं होगा.. जबतक चुप बैठे हैं
वो बचाकर अपनी जान चला जाए, जिसको भारत स्वीकार नहीं, वो
पाकिस्तान चला जाए, जो जाति, धर्म, मज़हब का रोना, छाती
पीटकर रोते हैं,
आंतकियों के मरने पर उनकी, मय्यत में शामिल होते
हैं, खून खौलता है सबका, कबतक हाथों को मला जाए, जिसको भारत स्वीकार नहीं, वो
पाकिस्तान चला जाये...
कुछ लोग देश में गद्दारों को भी साहब और जी कहते हैं, जयचन्दों
से है इतिहास भरा, ये हर युग में ही रहते हैं... हमदर्द हो जो गद्दारों का, वो
खुद शमशान चला जाये, जिसको भारत स्वीकार नहीं ,वो पाकिस्तान चला जाए....
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