बहुत दिन से सोच रहा हूं कि कुछ लिखूं... लेकिन किस पर लिखूं... कांग्रेस पर
लिखने लायक कुछ बचा नहीं है... फिर भी लिख दिया तो सांप्रदायिक होने का ठप्पा झेलो
बीजेपी या केंद्र सरकार के खिलाफ लिखो तो भक्त पोस्ट को पढ़ने लायक नहीं
छोड़ेंगे... आम आदमी पार्टी के बारे में लिखो तो इनके स्पेशल फॉलोवर्स या तो आपको
बीजेपी वाला बता डालेंगे... या फिर विपक्ष की साजिश... और अगर किसी की तारीफ कर दो
तब तो और भी गजब हो जाएगा... कांग्रेस की तारीफ करने पर भक्तगण और आपिये नहीं
छोड़ेंगे... बीजेपी की तारीफ करने पर पहले तो सांप्रदायिकता का ठप्पा और फिर सभी
पार्टियों के चेले चमकाना शुरू कर देंगे... और आप की तारीफ कर दो तब तो कुछ भी हो
सकता है.... अब बची जनता... उस पर क्या लिखा जाए.... वो वैसे ही परेशान है... और
अगर कुछ लिख दिया तब तो खुद को बुद्धिजीवी साबित करने के लिए कुछ लोग कुतर्कों की
बाढ़ लगा देंगे... और ना लिखो तो यार दोस्त कहते हैं कि क्या हुआ बड़े दिनों से
सोशल नहीं बचे हो... यानी हर तरह से मुसीबत ही मुसीबत...
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