बुधवार, 29 जुलाई 2015

क्या है याकुब का सच?, जिस दिन दुनिया में रखा कदम उसी दिन दुनिया से होंगे रुसवा, 30 जुलाई इतिहास के पन्नों में दर्ज

देश में इन दिनों दो मु्द्दों ने खुब सुर्खियां बटोरी है, एक तो है आतंकी गतिविधी में लिप्त पाए गए याकुब मेमन और दुसरें है, मिसाईल मैन जिसने पूरी दुनिया को अपना लोहा मनवाया है, इस शख्स के बारे में हर कोई अच्छी तरह वाकिफ है, ड़ॉ एपीजे अब्दुल कलाम जितना बड़ा नाम उतनी ही बड़ी इनकी शख्ससियत है.... खैर हमारा मुद्दा डॉ कलाम नही है बल्कि वो आतंकवादी है या फिर आतंकवादी बनाया जा रहा  है, हम बात कर रहे है याकुब मेमन की, मैंने हाल ही में इसके बारे में बड़े ध्यान से पड़ा है, पहले मैं भी आम लोगो की तरह  इसे भी आतंकवादी समझ बैठा, लेकिन जब मैने इसके बारे में पड़ा तब मेरी राय इसके प्रति बदल गई, लेकिन कुछ सवाल अभी भी ऐसे है जो सुलझे नहीं है... सरकार या फिर कोर्ट की माने तो ये 1993 के ब्लास्ट में शामिल था परक्या ये सच है...
  सेंट्रल मुंबई के बाइकुला में याकूब पला बढ़ा था.. वो औसत स्टूडेंट रहा, स्टेट सेकंडरी बोर्ड का एग्जाम याकूब ने 70 पर्सेंट मार्क्स के साथ पास किया था... फिर इसने बुरहानी कॉलेज ऑफ कॉमर्स ऐंड आर्ट्स से कॉमर्स में मास्टर किया... दूसरी तरफ याकूब का बड़ा भाई इब्राहिम मेमन उर्फ टाइगर मुंबई अंडरवर्ल्ड में अपना नाम स्थापित कर रहा था...
1986 में याकूब इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया का स्टूडेंट बना, चार साल बाद याकूब चार्टड अकाउंटेंट बन गया... इसके बाद याकूब के परिवार वालों की जिंदगी में बेहतरी आने लगी... टाइगर मेमन ने अपनी अवैध गतिविधियां बढ़ा दी थीं... हालांकि मेमन दावा करता है कि वह अपने बड़े भाई की अवैध ...गतिविधियों में शामिल नहीं था याकूब ने अपने दोस्त चैतन्य मेहता के साथ मिलकर एक फर्म बनाया था... इसका नाम 'मेहता ऐंड मेमन असोसिएट्स' दिया था...पुलिस के मुताबिक याकूब अपने बड़े भाई टाइगर का अकाउंट हैंडल करता था.. याकूब पर आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगा और पुलिस ने दावा किया कि उसने 1993 में मुंबई ब्लास्ट के लिए फंड की व्यवस्था की थी... विस्फोट के पहले याकूब और उसके परिवार वालों ने शहर छोड़ दिया था... ब्लास्ट में जिस गाड़ी का इस्तेमाल किया गया था उसे मेमन के परिवार वालों के पास से बरामद किया गया...
आगे चलकर मेमन का परिवार दुबई चला गया और फिर वहां से पाकिस्तान शिफ्ट हो गया.... हालांकि मेमन 18 महीने बाद इंडिया वापस आ गया... सीबीआई का दावा है कि याकूब को 5 अगस्त 1994 मे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से अरेस्ट किया गया... दूसरी तरफ मेमन का दावा है कि वो नेपाल में स्वेच्छा से 28 जुलाई 1994 को भारतीय एजेंसियों के समक्ष हाजिर हुआ था मेमन परिवार के सात और सदस्यों ने भारतीय एजेंसियों के समक्ष समर्पण कर दिया था...
 दुसरी तरफ आगर याकुब सही कह रहा है, तो फिर ये भारत के न्याय प्रणाली पर एक काला धब्बा होगा मैं पहले भी कह चूका है कि देश की इस कानून को तोड़ा बदलने की जरुरत है, 22 साल हो गए है इस आतंकी हमले को लेकिन उसकी सज़ा अब क्यो.. क्या इसकी जरुरत है...
लेकिन सवाल यहीं उठता है कि आखिर याकुब को दुबई जाने की जरुरत क्यो पड़ी और उस ब्लास्ट के समय वो भी पूरे परिवार के सांग, दुबई से नेपाल, नेपाल से पाकिस्तान आखिर इतना क्यो ट्रेवल कर रहा था याकुब... क्या इस ब्लास्ट के बारे में इस कुछ पता था... अगर था तो इसका जिम्मेदार वो भी उतना है जितना उसका बाई टाईगर...
 30 जुलाई को याकुब का जन्म हुआ और इतेफाक देखिए उसी दिन ही याकुब को फासी दी जा रही है... कुछ अनसुलझे गाठ याकुब 30 जुलाई को अपने साथ ले जाएगा, मैं भगवान से यही प्राथना करता हूं कुछ भी हो याकुब  निर्दोश  ना हो, वरना हम भारत वासियों  इंसानियत के नाम पर एख कलंक कहलाने वाले है.....  


रविवार, 5 जुलाई 2015

देश में डवलपमेन्ट हो रहा है

बेटा बाप से इंटैलिजेंट हो रहा है
अमिरों का काम अर्जेंट हो रहा है
गरीब बेचारे साइलैंट हो रहा है
रिश्वत से कार्य हैण्ड टू हैण्ड हो रहा है
ईमानदार बेचारा सस्पेण्ड हो रहा है
प्रदूषण आज हण्ड्रेड परसेंन्ट हो रहा है
चोरी और डैकती परमानेन्ट हो रहा है
फिर भी देश में डैवलपमेन्ट हो रहा है 

शुक्रवार, 3 जुलाई 2015

एक कदम सकारात्मक सोच की ओर...

महात्मा गांधी का प्रसिद्ध कथन है कि इंसान वैसा ही बनता जाता है जैसी वो सोच रखता है... ये विचार छोटे या बड़े हर व्यक्ति पर लागू होता है.. आप जिंदगी में सफल तभी हो सकते हैं जब आप सफलता हासिल करने के प्रति अपनी सोच को सकारात्मक रखेंगे... अगर अपनी खामियां ढूंढ-ढूंढकर खुद को कमतर ही आंकते रहेंगे तो कभी सफलता की ओर कदम नहीं बढ़ा सकेंगे..

अगर आप थोड़ी सी परेशानियों से घिरने पर खुद की क्षमताओं पर ही संदेह करने लगेंगे तो सफल होना मुश्किल है.. हो सकता है कि एक बार प्रयास करने पर सफलता न मिले लेकिन अगर आप नकारात्मकता से दूर रहते हुए पूरे मन से प्रयास करेंगे तो सफलता मिलनी तय है...

सकारात्मक सोच का संबंध सिर्फ आपके करियर से ही नहीं है, ये आपके परिवारिक और सामाजिक जीवन से भी जुड़ी है... नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति अपने आसपास एक ऐसा नकारात्मक माहौल बना लेते हैं.. जो उनके साथ-साथ उनके आसपास के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालता है...

कभी गौर करें कि जब आप जीवन के प्रति सकारात्मक बातें करते हैं तो बहुत से लोग आपकी ओर आकर्षि‍त होते हैं वहीं अगर आप हर समय जीवन के नकारात्मक पहलुओं को ही कुरेदते रहते हैं तो हर कोई आपके साथ से बचना ही चाहता है....

जीवन से जुड़ी अपेक्षाएं पूरी न होने पर निराशा स्वाभाविक है लेकिन अगर आप उस निराशा के अंधेरे में ही डूबे रहेंगे तो आशा की दूसरी किरणों को पहचान भी नहीं पाएंगे. याद कीजिए फिल्म थ्री इडियट्स में आमिर खान का वो जुमला-‘ऑल इज वैल’...

आमिर इस फिल्म में कहते भी हैं कि ये जुमला कहने का ये मतलब नहीं कि सारी परेशानियां खत्म हो गईं बल्कि इसे बोलने का मकसद तो हमारे सामने पेश आने वाली परेशानियों से लड़ने की ताकत हासिल करना है... 

गुरुवार, 2 जुलाई 2015

मेरे अलफाज़: कलम है पर सोच नहीं, लिखें तो लिखें क्या ?

मेरे अलफाज़: कलम है पर सोच नहीं, लिखें तो लिखें क्या ?: बहुत दिन से सोच रहा हूं कि कुछ लिखूं... लेकिन किस पर लिखूं... कांग्रेस पर लिखने लायक कुछ बचा नहीं है... फिर भी लिख दिया तो सांप्रदायिक होन...

मेरे अलफाज़: जिसको भारत स्वीकार नहीं, वो पाकिस्तान चला जाये...

मेरे अलफाज़: जिसको भारत स्वीकार नहीं, वो पाकिस्तान चला जाये...: अब वो नस्ल है बदल चुकी , जब फिर से हिन्दू छला जाये , जिसको योगा स्वीकार नहीं वो मक्का मदीना चला जाये, जिसको भारत स्वीकार नहीं , वो पाकिस्...

मेरे अलफाज़: क्या है देश की स्थिति.........

मेरे अलफाज़: क्या है देश की स्थिति.........: 15 जून को मनाया जाता है WORLD ELDER ABUSE DAY, देखिए इतनी शर्मनाक बात है कि ये इतना ज्यादा होता है कि इसके लिए अलग दिन रखा गया है... हाल ही...

मेरे अलफाज़: फिल्म को प्रमोट करने के लिए ''साला कुछ भी करेंगे''...

मेरे अलफाज़: फिल्म को प्रमोट करने के लिए ''साला कुछ भी करेंगे''...: न जाने ये फिल्मी सितारें अपनी फिल्म को प्रमोट करने के लिए न जाने क्या क्या करेंगे.....अगर इनके प्रमोशन के तरीको को देखा जाए तो इससे साफ अंद...