देश में इन दिनों दो मु्द्दों ने खुब सुर्खियां
बटोरी है, एक तो है आतंकी गतिविधी में लिप्त पाए गए याकुब मेमन और दुसरें है,
मिसाईल
मैन जिसने पूरी दुनिया को अपना लोहा मनवाया है, इस शख्स के बारे
में हर कोई अच्छी तरह वाकिफ है, ड़ॉ एपीजे अब्दुल कलाम जितना बड़ा नाम
उतनी ही बड़ी इनकी शख्ससियत है.... खैर हमारा मुद्दा डॉ कलाम नही है बल्कि वो
आतंकवादी है या फिर आतंकवादी बनाया जा रहा
है, हम बात कर रहे है याकुब मेमन की, मैंने
हाल ही में इसके बारे में बड़े ध्यान से पड़ा है, पहले मैं भी आम
लोगो की तरह इसे भी आतंकवादी समझ बैठा,
लेकिन
जब मैने इसके बारे में पड़ा तब मेरी राय इसके प्रति बदल गई, लेकिन कुछ सवाल
अभी भी ऐसे है जो सुलझे नहीं है... सरकार या फिर कोर्ट की माने तो ये 1993 के
ब्लास्ट में शामिल था पर, क्या
ये सच है...
सेंट्रल मुंबई के बाइकुला में याकूब पला बढ़ा था.. वो औसत स्टूडेंट रहा,
स्टेट
सेकंडरी बोर्ड का एग्जाम याकूब ने 70 पर्सेंट मार्क्स के साथ पास किया
था... फिर इसने बुरहानी कॉलेज ऑफ कॉमर्स ऐंड आर्ट्स से कॉमर्स में मास्टर किया...
दूसरी तरफ याकूब का बड़ा भाई इब्राहिम मेमन उर्फ टाइगर मुंबई अंडरवर्ल्ड में अपना
नाम स्थापित कर रहा था...
1986 में याकूब इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टड अकाउंटेंट्स
ऑफ इंडिया का स्टूडेंट बना, चार साल बाद याकूब चार्टड अकाउंटेंट बन
गया... इसके बाद याकूब के परिवार वालों की जिंदगी में बेहतरी आने लगी... टाइगर
मेमन ने अपनी अवैध गतिविधियां बढ़ा दी थीं... हालांकि मेमन दावा करता है कि वह
अपने बड़े भाई की अवैध ...गतिविधियों में शामिल नहीं था याकूब ने अपने दोस्त
चैतन्य मेहता के साथ मिलकर एक फर्म बनाया था... इसका नाम 'मेहता ऐंड मेमन
असोसिएट्स' दिया था...पुलिस के मुताबिक याकूब अपने बड़े
भाई टाइगर का अकाउंट हैंडल करता था.. याकूब पर आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगा और
पुलिस ने दावा किया कि उसने 1993 में मुंबई ब्लास्ट के लिए फंड की
व्यवस्था की थी... विस्फोट के पहले याकूब और उसके परिवार वालों ने शहर छोड़ दिया
था... ब्लास्ट में जिस गाड़ी का इस्तेमाल किया गया था उसे मेमन के परिवार वालों के
पास से बरामद किया गया...
आगे चलकर मेमन का परिवार दुबई चला गया और फिर
वहां से पाकिस्तान शिफ्ट हो गया.... हालांकि मेमन 18 महीने बाद
इंडिया वापस आ गया... सीबीआई का दावा है कि याकूब को 5 अगस्त 1994 मे
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से अरेस्ट किया गया... दूसरी तरफ मेमन का दावा है कि वो
नेपाल में स्वेच्छा से 28 जुलाई 1994 को भारतीय
एजेंसियों के समक्ष हाजिर हुआ था मेमन परिवार के सात और सदस्यों ने भारतीय
एजेंसियों के समक्ष समर्पण कर दिया था...
दुसरी
तरफ आगर याकुब सही कह रहा है, तो फिर ये भारत के न्याय प्रणाली पर एक
काला धब्बा होगा मैं पहले भी कह चूका है कि देश की इस कानून को तोड़ा बदलने की
जरुरत है, 22 साल हो गए है इस आतंकी हमले को लेकिन उसकी
सज़ा अब क्यो.. क्या इसकी जरुरत है...
लेकिन सवाल यहीं उठता है कि आखिर याकुब को दुबई
जाने की जरुरत क्यो पड़ी और उस ब्लास्ट के समय वो भी पूरे परिवार के सांग, दुबई
से नेपाल, नेपाल से पाकिस्तान आखिर इतना क्यो ट्रेवल कर रहा था याकुब... क्या
इस ब्लास्ट के बारे में इस कुछ पता था... अगर था तो इसका जिम्मेदार वो भी उतना है
जितना उसका बाई टाईगर...
30 जुलाई को याकुब
का जन्म हुआ और इतेफाक देखिए उसी दिन ही याकुब को फासी दी जा रही है... कुछ
अनसुलझे गाठ याकुब 30 जुलाई को अपने साथ ले जाएगा, मैं
भगवान से यही प्राथना करता हूं कुछ भी हो याकुब
निर्दोश ना हो, वरना
हम भारत वासियों इंसानियत के नाम पर एख
कलंक कहलाने वाले है..... 
