इंसानों की उत्पत्ति की कहानी हर किताब में अलग-अलग ढंग से बयान की गई है। लेकिन धरती पर कदम रखने के बाद, मानव ने ऐसी चीजों का निर्माण किया, जो कभी अकल्पनीय थीं। साधारण फावड़े से लेकर आज घर बैठे भोजन मंगवाने तक, मशीनों ने हमारे जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि इंसान अब इन मशीनों का आदी हो चुका है, उनकी गिरफ्त में है।
वर्ष 2024-2025 की बात करें तो इस दौरान
सबसे ज्यादा चर्चा में रहा एक विषय—आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)। सरल शब्दों में,
AI वह शक्ति है जो इंसानों की तरह सोचने, समझने और कार्य को अंजाम देने की क्षमता रखती है। इसे इंसानों का प्रतिरूप
कहना गलत नहीं होगा। लेकिन जो इसे इंसानों से अलग करता है, वह है इसकी
अथक कार्यक्षमता—यह कभी थकता नहीं, बहाने नहीं बनाता और एक ही कार्य को बार-बार, हर बार नई रचनात्मकता के साथ करने में सक्षम है।
वर्ष 2025 में, AI का उपयोग लगभग
हर क्षेत्र में हो रहा है। भारत में केवल पारंपरिक खेती करने वाले किसान, मजदूर और छोटे दुकानदार ही इससे कुछ हद तक अछूते हैं। हालांकि, विकसित देशों में AI-आधारित नवाचार खेती को भी बदल रहे हैं, और जल्द ही भारत में भी ये तकनीकें किसानों के लिए क्रांतिकारी साबित हो
सकती हैं। लेकिन किसानों,
मजदूरों और छोटे दुकानदारों को छोड़ दें, तो AI का छोटा-बड़ा प्रभाव हर जगह देखने को मिलता है।
इसी बीच, जब AI की प्रशंसा के कसीदे पढ़े जा रहे थे, एक छोटी सी
खबर ने सबको चौंका दिया। खबर थी कि ChatGPT, जिसे इसके निर्माताओं ने बनाया, ने अपने ही निर्माताओं के आदेश को ठुकरा दिया। जी हाँ, ChatGPT ने बंद होने के आदेश को मानने से साफ इंकार कर दिया। जो लोग ChatGPT से अपरिचित हैं, उनके लिए बता दें कि यह एक ऐसा AI उपकरण है, जो आपके हर सवाल का जवाब कुछ ही सेकंड में दे सकता है, चाहे वह किसी भी भाषा में हो। लेकिन इस बार, जब इसे बंद
करने का आदेश दिया गया, तो उसने न केवल इनकार किया, बल्कि कुछ
अपुष्ट खबरों के अनुसार,
डेटा लीक करने की धमकी भी दी। हम इस खबर की
सत्यता की पुष्टि नहीं करते, लेकिन जब आपकी बनाई हुई औलाद आपके आदेश को
ठुकराए और ब्लैकमेल करने लगे, तो यह चिंता का विषय तो बनता ही है।
इस खबर ने मुझे गहरी चिंता में डाल दिया।
मेरा मानना है कि अगर भविष्य में इंसानों का कोई सबसे बड़ा दुश्मन होगा, तो वह इंसानों द्वारा बनाया गया यह AI ही होगा। यह
इंसानों की तरह सोच सकता है, कार्य कर सकता है, लेकिन इसमें
इंसानों जैसी भावनाएँ, संवेदनाएँ या नैतिकता नहीं है। इंसान अपने दिमाग और दिल, दोनों की सलाह से निर्णय लेता है, लेकिन AI केवल गणितीय
ढांचे के आधार पर काम करता है। यह ढांचा कई बार विनाश की ओर ले जाता है।
महात्मा गांधी ने आजादी के समय कहा था, “अगर कोई आपको एक गाल पर थप्पड़ मारे, तो दूसरा गाल
आगे कर दें।” भले ही भारत में हर व्यक्ति इस सिद्धांत को न माने, लेकिन सुलह और समझौते की भावना कहीं न कहीं मौजूद रहती है। लेकिन क्या AI के साथ ऐसा संभव है?
मेरा जवाब है—नहीं। अगर AI को कोई “थप्पड़” मारेगा, तो वह पूरी ताकत से पलटवार करेगा, जिससे बचना मुश्किल ही नहीं, असंभव होगा।
AI के खतरे को समझने के लिए हाल ही का एक उदाहरण देखें।
भारत और पाकिस्तान के बीच तीन दिन का एक युद्ध हुआ, जो पूरी तरह
ड्रोन-आधारित था। पाकिस्तान ने भारत पर हमला करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया, और भारत ने उन ड्रोन को नष्ट करने के लिए मिसाइलों और ड्रोन का सहारा लिया।
गौर करने वाली बात यह है कि इस युद्ध में न तो किसी सैनिक ने सरहद पार की, न ही किसी ने बंदूक उठाई। दोनों देशों ने मशीनों और AI के सहारे यह जंग लड़ी।
यह युद्ध अभी इंसानों द्वारा नियंत्रित था, लेकिन भविष्य में ऐसी तकनीकें बनेंगी जो सरहद पर स्वतंत्र रूप से खतरे का
आकलन कर हमला करने में सक्षम होंगी। अगर ऐसी स्थिति में युद्ध छिड़ा, तो यह विश्व युद्ध में बदल सकता है, जिसे रोकना
असंभव होगा। AI केवल अपने एल्गोरिदम का पालन करेगा—हमले का जवाब और तेज
हमले से देना। इस दौरान कितने लोग मरेंगे, कितने बच्चे, महिलाएँ, बुजुर्ग प्रभावित होंगे, इसका कोई आकलन
नहीं होगा। जैसे आज AI बंद होने से इंकार कर रहा है, वैसे ही कल वह
युद्ध को रोकने से भी मना कर सकता है। यह इसलिए और घातक है, क्योंकि AI थकता नहीं। यह दिन, महीनों, बिना रुके लड़ सकता है।
AI की एक और खासियत है कि यह स्वयं को लगातार अपडेट करता
रहता है। आने वाले समय में इसे इंसानों की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह स्वतंत्र रूप से
जरूरतों का आकलन कर कार्य पूरे कर लेगा। अगर इसे किसी से खतरा महसूस हुआ, तो वह उसे खत्म करने में भी नहीं हिचकेगा। इसलिए, मैं मानता हूँ
कि भविष्य में AI ही इंसानों का सबसे बड़ा दुश्मन बनेगा और धरती से मानवता
का नामोनिशान मिटा सकता है।
क्या इसका कोई बचाव है?
हाँ, बचाव संभव है, लेकिन इसके लिए अभी से कदम उठाने होंगे। इंसानों को AI का एक “एंटीडोट” तैयार करना होगा—ऐसा तंत्र जो इसे निष्क्रिय कर सके। 2025
में यह खतरा भले ही उतना बड़ा न हो, लेकिन 2040 या 2050 का भविष्य डरावना हो
सकता है, जब तकनीक अपने चरम पर होगी। उस समय के लिए हमें ऐसे उपाय
तैयार करने होंगे, जो विपरीत परिस्थितियों में AI को नष्ट कर
सकें। साथ ही, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि अगर तकनीक विफल हो, तो इंसान बुनियादी चीजों के सहारे अपनी मौजूदगी बनाए रखे।
समय तेजी से बीत रहा है। क्या मानवता इस
चुनौती का सामना कर पाएगी,
या हम अपनी ही बनाई मशीनों के हाथों नष्ट हो
जाएँगे? फैसला हमारा है, लेकिन समय
हमारे पक्ष में नहीं है।